हम भारतीय बहुत ही ज्यादा भावुक होते है और यह भावना तब और भी बढ़ जाता है जब बात देश, तिरंगा, देश के क्रांतिकारी, देश के जवान और देश के किसान के बारे में हो रहा हो. इन सब में से किसी भी विषय पर चर्चा हो रहा हो, हम भारतीय पहले से ही इस पक्ष से खुद को ऐसे जोड़ लेते है, जैसे वो हमारे अपने हो और सबसे बढ़कर हो. ऐसा हर भारतीय को करना भी चाहिए, क्योंकि ये हमारे अपने है और सबसे बढ़कर है. कुछ ऐसा ही हुआ किसान आंदोलन के समय. पूरा देश खुद को किसानों के साथ मानता रहा और उनके संघर्ष में उसके साथ खड़ा रहने को भी तैयार था. हालाँकि कुछ लोगो के मन में कुछ सवाल थे, परन्तु उनकी भी सहानुभूति किसानों के साथ ही थी. परन्तु किसानों के साथ की यह सहानुभूति तब भंग हो गई, जब किसान 26 जनवरी के दिन ट्रेक्टर परेड के दौरान लाल किले पर चढ़ गए और वहाँ से "निशान साहिब" का झंडा लाल किले से लहरा दिया. कुछ तस्वीरें और विडिओ ऐसे भी सामने आए, जब कुछ किसान तिरंगे का अपमान करते देखे गए. तब लगभग पुरे देश ने इसका विरोध किया और अपना आक्रोश इन किसानों पर जाताना शुरू कर दिया. ऐसे में कुछ इन्हे नकली किसान, खालिस्तानी कह कर पुकारने...
भारत देश के इतिहास, क्रन्तिकारी, सेना, समाज, धर्म, राजनीती, नेता, जनता इत्यादि विषयों पर अपने विचार और अर्धसत्य का सम्पूर्ण सत्य सामने रखने की क्रांति.