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कविता: नेताओं की फितरत

लगभग हर एक राजनैतिक पार्टी के शासन काल के दौरान कुछ अप्रिय घटनाएँ घटित होती रही है, किसी के शासनकाल में ऐसी घटनाएँ कम होती है, तो किसी शासनकाल में ज्यादा. कोई राजनैतिक पार्टी इसके प्रति कुछ ठोस कदम उठती है, तो कुछ उदासीन रहती है. परंतु यह सभी राजनैतिक पार्टियाँ कुछ घटित होने के बाद ही हरकत में आती है. भविष्य में ऐसी कोई घटना हो ही नहीं, इस दिशा में कोई कोई कदम नहीं उठता. आजादी के समय दिया हुआ गरीबी मिटाओ का नारा, आजादी के 74 वर्षों के बाद भी वैसे ही चल रहा है. गरीबी तो मिटी, परंतु सिर्फ गरीबों के नाम पर राजनीती करने वालों की, गरीबों की नहीं. वो बेचारे तो और भी ज्यादा गरीब हो गए. वैसी ही हालत किसानों और सेना के जवानों की है. दोनों ही देश के रीड की हड्डी है. परंतु रोजाना दोनों ही के मरने की खबर आती रहती है. इन्ही सब बातों से मन परेशान हुआ था, तो मैंने यह कविता लिखा था. हालाँकि यह कविता 8 से 9 वर्ष पुरानी है, परंतु आज शेयर कर रहा हूँ. पसंद आए तो Like, Share, Comment और The Puratchi Blog को Subscribe जरूर करें. कविता का शीर्षक है,


नेताओं की फितरत

सुनो कहानी भारत की हम तुम्हे सुनाते है,
फितरत नेताओ की आज तुम्हे बताते है.
नेता भोली जनता का खुब फायदा उठाते है,
आग लगा कर घरो मे अपनी रोटी पकाते है.
वोट के लिए हिन्दु मुस्लिम दलित याद आते है,
पर चुनाव जीत कर क्या उनकी सुनने जाते है?
गरीब गरीबी का नाम दे ये खुब नारे लगवाते है,
चुनाव जीत कर बस पार्क मुर्तिया बनवाते है.
सैनिक क्या फौज मे सिर्फ गोली खाने कोे है,
या किसान आत्महत्या करने आँसु बहाने को है?
देशद्रोही को नेता बेटी कहते और गले लगाते है,
तिरंगे पर लाठी चली तो इनके होठ सील जाते है.
पर गलती इनकी नही ये राजनीति धर्म निभाते है,
ये हमे बाँटते है और हम हर बार बँट जाते है.
ये हमे बाँटेंगे जब तक हम यू ही बँटते रहेगे,
पड़ोसी के सपने को ये नेता एक दिन पूरा करेंगे.
70 साल हुए आजादी को तस्वीर ये बदलती नही,
लोकतंत्र है देश मे और लोगो की चलती नही.
दूर रहना इनके आंदोलनो से वो सिर्फ जुमले है,
नेहरु, लालु, मुलायम, केजरी वही से निकले है.
जो बदलाव चाहते हो एक बार जागो तो सही,
70 साल का हिसाब इन नेताओ से माँगो तो सही.
पूछो क्या जंजीर है ये जो काटे नही कटती?
कैसी गरीबी है जो इनके हटाए नही हटती?
भारत माता की जय पर तब ना तकरार होगा,
जान से प्यारे तिरंगे पर फिर कभी ना वार होगा.

जय हिन्द
वंदेमातरम


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